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कार्यशाला के तीसरे दिन चैती एवं गंगा दशहरा गीतों का अभ्यासस्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्राम सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चुनार, मीरजापुर में दिनांक 23 मई 2026 को “पूर्वी लोकगीत : इतिहास, समाज और संगीत (मीरजापुर के विशेष संदर्भ में)” विषयक कार्यशाला के तीसरे दिन का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

कार्यशाला के तीसरे दिन चैती एवं गंगा दशहरा गीतों का अभ्यास
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विश्राम सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय चुनार, मीरजापुर में दिनांक 23 मई 2026 को “पूर्वी लोकगीत : इतिहास, समाज और संगीत (मीरजापुर के विशेष संदर्भ में)” विषयक कार्यशाला के तीसरे दिन का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या प्रो० (डॉ०) माधवी शुक्ला ने किया। उन्होंने कहा कि संगीत मानव जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मन को शांति, आनंद और ऊर्जा प्रदान करता है।
मुख्य प्रशिक्षक प्रो० संगीता सिंह, वाद्य विभाग, संगीत एवं मंच कला संकाय, काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने कहा कि बच्चों के बौद्धिक और भावनात्मक विकास में संगीत सहायक होता है। यह लोगों को आपस में जोड़ने और प्रेम तथा सद्भाव बढ़ाने का कार्य करता है। इसी क्रम में उनके शोध छात्र प्रिया मिश्रा, श्रेया मिश्रा, सुधीर कुमार गौतम, हिमांशु वर पुजारी एवं सुहासिनी शर्मा ने विद्यार्थियों को विभिन्न लोकगीतों यथा ‘ येही थईयां मोतिया हेरा गइलें रामा’ , ‘लहर-लहर लहराए गंगा तोरी अमृत धारा’ का अभ्यास कराया ।
कार्यक्रम का संचालन डॉ० रीता मिश्रा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम की संयोजक भातखण्डे कल्चरल प्रभारी प्रो० कुसुम लता ने प्रस्तुत किया। कार्यशाला में डॉ संकठा प्रसाद सोनकर, डॉ मनोज कुमार प्रजापति, डॉ दीप नारायण, डॉ अरुणेश कुमार, डॉ अरविन्द कुमार, डॉ सत्येन्द्र कुमार, डॉ शेफालिका राय, डॉ शिखा तिवारी, डॉ मंजुला शुक्ला, डॉ गुरु प्रसाद, धर्मचन्द्र, धर्मेन्द्र सिंह, रामकेश सोनकर, शोधार्थी एवं 30 विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।

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