
सप्त दिवसीय गऊ माता का समापन और प़साद बितरण
सभी हिन्दुओं, मुसलमानो ,सिख , ईसाईयों की मां हैं गाय माता
सबको गाय माता रखना चाहिए
सीखड़ मीरजापुर। क्षेत्र के पचराॅव गांव में स्थित नारायण गृहस्थ आश्रम नारायण नगर पचराव, चुनार, मीरजापुर में सप्त दिवसीय गऊ कथा के बिश्राम दिवस पर तथा राम नवमी के पावन पर्व पर प़साद बितरण किया गया।
जिसमें दूध से बने मिठी दही , पनीर और दूध से बनी आईसक़ीम बांटी गई।
कथा का डिजिटल प्रसारण करके परम्पूज्य साध्वी श्रध्दा गोपाल दीदी के मुखार बिन्दु से गऊ कथा सुनाई गई।
साध्वी श्रध्दा गोपाल दीदी ने बताया कि हमारी पहली मां है गाय माता।
सबसे पहले गाय माता ने पृथ्वी पर मां शब्द का उच्चारण किया था।
गाय माता मे ममता, करूणा , प्रेम वात्सल्य, और प्यार कूट कूट कर भरा है।वह देशी गाय माता में। देशी गाय माता के दूध , दही , घी , गोबर और गोमूत्र से अनेकों असाध्य से असाध्य बिमारियों का ईलाज सम्भव है। गाय माता के गोमूत्र से कैंसर जैसे बिमारियां ठीक की जा सकती है। और पंचगव्य के सेवन मात्र ही हड्डीओ तक के पाप दूर हो जाते हैं।
गर्भावस्था से लेकर ही पंचगव्य का सेवन किया जाय तो जो बच्चा पैदा होगा वह बहुत तीक्ष्ण बुद्धि वाला होगा।इसका जीता-जागता उदाहरण है गुजरात के गांधी नगर का बच्चा है जो गणित का सवाल कम्प्यूटर से भी तेज देता है ।जब उसकी मां से पत्रकारो ने पूछा कि इस बच्चे को क्या खिलाया पिलाया है तब उसकी मां ने बताया कि मैंने इसको पैदा होते ही पंचगव्य का सेवन कराया था। सनातन हिन्दू संस्कार के सोलहवें संस्कार में अन्न प़ासन संस्कार में, मुन्डन संस्कार में पंचगव्य का सेवन कराया है। दीदी ने अपनी कथा में बताया कि बच्चा लड़का चाहिए या लड़की सब पंचगव्य से सम्भव है। यहां तक कि लड़के को कैसी बहू चाहिए और लड़की को कैसा दूल्हा चाहिए सब देशी गाय माता के पंचगव्य से 100% सम्भव है। देशी गाय माता के गोमूत्र से अनेकों प्रकार के बिमारियों को दूर करने का उपाय बताया। यहां तक कि गाय माता की कृपा से ही हमारा देश स्वतंत्र हुआ है। मंगल पाण्डेय की कथा का जिक्र करते हुए कहा कि गाय माता के चमड़े से बने बन्दूक की कारतूस का अंग्रेजों के सामने न चलाने का बहिष्कार किया था।
देशी गाय माता का दूध का सेवन किया जाय तो वह अमृत के समान है। दूध और दही का किन किन महिने में नहीं लेना चाहिए, और क्यों नहीं लेना चाहिए सब विस्तार पूर्वक जानकारी दी।
सात दिन की कथा में अनेको प़सगो पर चर्चा की। प्रत्येक मनुष्य को दिन में खाना खाने के बाद एक गिलास छाछ और सोते समय एक गिलास देशी गाय माता का दूध का सेवन करने से जीवन में कोई भी बिमारी हो नहीं सकती। पढ़ने वाले बच्चों को केवल देशी गाय माता का दूध पिलाना चाहिए। इससे बच्चा तेज दिमाग वाला और फुर्तीला होंगा जो पढ़ने में भी तेज होगा और स्पोर्ट्स में भी तेज तर्रार होगा । देशी गाय माता का बच्चा, भैंस के बच्चा में क्या अन्तर है बहुत विस्तार पूर्वक बताया।सभी जानवरों के आवाज के बारे में बताया और कहा कि संसार में केवल देशी गाय माता का ही बच्चा जब पैदा होता है तब मां शब्द का उच्चारण करता है और यहां तक कि सब चौरासी लाख योनियों में सबसे श्रेष्ठ और बुद्धि मान मनुष्य है जब मनुष्य का बच्चा पैदा होता है तब सबसे पहले रोता है और देशी गाय माता का बच्चा मां शब्द का उच्चारण करके आवाज देता है। देशी गाय माता मे शास्त्र का उदाहरण देते हुए कहा कि गाय माता के गोबर में लक्ष्मी माता का वास होता है। इसीलिए प्रत्येक हिन्दू सनातन धर्म की पूजा में देशी गाय माता के गोबर से गौरी मां बनाई जाती है। और पूजा की जाती है।
यहां तक कि शंकर जी के रूद्राभिषेक में सबसे पहले पंचगव्य का सेवन कराकर पूजा प्रारम्भ किया जाता है।सबको ब़त रखने से पहले पंचगव्य का सेवन करना चाहिए।
बड़े अफसोस और दुःख का बिषय है कि ऐसे जीव को पशु कहा जाता है। गाय हमारी मां है पशु नहीं है। गाय को हमेशा गाय माता ही कहना चाहिए ऐसा बोलने मात्र से ही नकारात्मक ऊर्जा और शक्तियों का प्रभाव खत्म हो जाता है। गाय माता के गोमूत्र मात्र के छिड़काव मात्र से ही सारी नकारात्मक शक्तियां खत्म हो जाती है।
महर्षि ऋष्य ऋ॑ग सेवा संस्थान (पंजी) नारायण गृहस्थ आश्रम नारायण नगर पचराव के प्रबन्धक इन्जीनियर बीरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बिचित्रानन्द ने इस कथा से प्रेरित होकर तीन महीने से देशी गाय माता को आश्रम परिसर में रख कर सेवा कर रहे हैं और अपने जीवन के अनुभव को लोगों के साथ सेयर कर रहे हैं।
बिचित्रानन्द ने बताया कि मैं बचपन में खुब गाय चराया है और खुब दूध पिया है।
अब जंगल में 80 प्रकार के जानवरों के साथ रहकर भी बहुत विचित्र आनन्द की अनुभूति कर रहे हैं। सुबह-सुबह गाय माता को एक पारले का बिस्किट खिलाकर प़णाम करके दिन की शुरुआत करते हैं और उनका एकही लक्ष्य है सब जगह गाय माता की कथा सुनाएं और वृक्षारोपण करें। जिससे अपने प्रदेश के यशस्वी, संत परम् श्रद्धेय मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज के सपनों को साकार करने में अपना तन , मन और धन को लगाकर अपने मानव जीवन को सार्थक बनाएं। और दिन दुखियों और जानवरों की सेवा करें।बिचित्रानन्द ने बताया कि जीवन में दुःख ही एक ऐसी चीज है कि जो मनुष्य को परम् ऊंचाईयों पर ले जा सकती है और यह शक्ति केवल केवल गाय माता और जगत जननी ललित त्रीपुरसुन्दरी मां भगवती वैष्णो देवी मां की कृपा से ही सम्भव है प़ति दिन अपने गांव के स्व रामदेव पाण्डेय जी के भजनों को गाते हैं* कि घरही में मन्दिर बनईबय तीरथ हम घुमही न जाबय*
समाज सेवा करने की प्रेरणा नोएडा से डा महेश शर्मा और समाजसेवी महेश सक्सेना के सानिध्य में रहकर सीखी है और बाबा विश्वनाथ और मां बिन्ध्यबासिनी देवी के क्षेत्र में अपने मातृभूमि पर रह कर कर रहे हैं यह मेरा परम् सौभाग्य है। और सबको जय माता की शब्द से ही प्रणाम , अभिवादन, सत्कार करते हैं।
यह प्रेरणा अपने पिता स्व राम नारायण सिंह और माता प़ेमा देवी से लेकर अपने मानव जीवन को सार्थक बनाने में जूटे हुए हैं।यह सब प्रेरणा सद्गगुरदेव जल वाले गुरु जी स्वामी जलेश्वरानन्द गिरी जी महाराज के सानिध्य में रहकर पाया है और उनके बताए हुए मार्ग और कर्म को प़सस्थ करने में लगे हुए हैं। विशेष कृपा स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज की हुई पुरा भारत घुमाने में और 2001 में सभी पवित्र नदियों के उद्गम् स्थान से जल लाकर तीर्थ राज प्रयागराज का जलाभिषेक करने का सौभाग्य मिला।मेरे जीवन का असली जीवन 2001से शुरू हुआ है और यही असली उम्र है जो नारायण हरि के भजनों में लग जाय।