
स्काउट आंदोलन के मजबूत स्तंभ सुरेश सिंह का निधन, अहरौरा शोक में डूबा
पेड़ भले ही गिर जाए, लेकिन उसकी छाया हमेशा याद रहती है…
अहरौरा,मिर्जापुर। शिक्षा जगत और स्काउट-गाइड परिवार के लिए आज का दिन बेहद दुखद रहा। पूर्व प्राचार्य/प्रबंधक एवं प्रादेशिक परिषद उ.प्र. भारत स्काउट/गाइड के पूर्व आमेलित सदस्य, कर्म और संस्कार से सच्चे स्काउट सुरेश सिंह का 23 मार्च की भोर में काशी में निधन हो गया।उनके निधन की खबर मिलते ही अहरौरा ही नहीं, पूरे मिर्जापुर जनपद में शोक की लहर दौड़ गई। हर आंख नम दिखी, हर जुबान पर बस एक ही बात—एक सच्चा मार्गदर्शक चला गया।
स्व. सिंह का पार्थिव शरीर जब उनकी कर्मस्थली जय हिंद अहरौरा और वनस्थली महाविद्यालय (स्काउट-गाइड प्रशिक्षण केंद्र) पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया। स्काउट-गाइड के बच्चों ने आंखों में आंसू लिए अपने गुरु को अंतिम सलामी दी—यह दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।इसके बाद उनका पार्थिव शरीर उनकी जन्मभूमि पचेवरा कैंलहट ले जाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा।
हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम विदाई
वाराणसी के पावन हरिश्चंद्र घाट पर सायंकाल उनका अंतिम संस्कार हुआ, जहां उनके छोटे पुत्र श्री प्रकाश सिंह ने मुखाग्नि दी। पूरा घाट “अमर रहें” के नारों और नम आंखों का गवाह बना।एक सपना अधूरा रह गया…स्व. सुरेश सिंह का सपना था कि मिर्जापुर में राज्य स्तरीय स्काउट-गाइड प्रशिक्षण केंद्र स्थापित हो। इसके लिए उन्होंने जमीन तक प्रस्तावित कराकर फाइल लखनऊ मुख्यालय तक पहुंचाई थी। उनका यह अधूरा सपना अब समाज के लिए एक जिम्मेदारी बन गया है।अंतिम यात्रा में क्षेत्र के सैकड़ों लोग शामिल हुए। इंजीनियर अखिलेश कुमार सिंह, डॉ. अभिषेक कुमार सिंह, सन्तोष कुमार सिंह,संजय भाई पटेल, प्राचार्य संतोष सिंह, प़बन्धक सिद्धनाथ गुप्ता, कमला देवी, दिव्या रानी सिंह समेत बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और स्काउट-गाइड परिवार के सदस्य मौजूद रहे।