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खबर चलाने पर पत्रकार को थाने बुलाने का विवाद, थाना प्रभारी का सीयूजी नंबर से फोन

विंध्याचल धाम में वीआईपी कल्चर और ₹500 लेकर दर्शन का आरोप

खबर चलाने पर पत्रकार को थाने बुलाने का विवाद, थाना प्रभारी का सीयूजी नंबर से फोन

मिर्जापुर। सावन की कांवड़ यात्रा के दौरान देशप्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ विंध्यवासिनी धाम में भारी अव्यवस्था, अवैध वसूली और वीआईपी संस्कृति के आरोपों ने श्रद्धालुओं में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस खबर को प्रमुखता से प्रसारित करने वाले स्थानीय पत्रकार को विंध्याचल थाना प्रभारी ने सीयूजी नंबर से फोन कर थाने बुलाकर तहरीर देने का दबाव बनाया। इस घटना से पत्रकार समुदाय में काफी रोष है।

भक्तों का आरोप है कि सामान्य दर्शन लाइन में लोग घंटों खड़े रह रहे हैं, जबकि वीआईपी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है और ₹500 लेकर तुरंत दर्शन कराए जा रहे हैं।

बहराइच से छोटे बच्चे के साथ आए शिवम अग्रवाल ने कहा, “मेरा बच्चा छोटा है। प्रशासन 500 रुपये मांग रहा है और कह रहा है कि 2 मिनट में दर्शन करा देंगे। सामान्य लाइन में लोग तीन घंटे से खड़े हैं।”

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से आए विकास सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधी अपील की। उन्होंने कहा, “एक वीआईपी के साथ 50 लोग अंदर जा रहे हैं। पुलिस पैसे लेकर दर्शन करवा रही है। गरीब भक्तों के बच्चे रोते हुए घंटों खड़े हैं। धर्म के नाम पर लूट बंद होनी चाहिए।”

पत्रकार पर पुलिस का दबाव

इन अव्यवस्थाओं को कैमरे में कैद कर खबर चलाने वाले पत्रकार रवींद्र जैसवाल के अनुसार, खबर वायरल होते ही विंध्याचल थाना प्रभारी का सीयूजी नंबर से फोन आया। थाना प्रभारी ने कहा, “आपने जो न्यूज चलाई है, आकर एक तहरीर दे दीजिए, मुकदमा लिखा जाना है। अधिकारियों का आदेश है, सीओ साहब का आदेश है कि आप आएंगे और तहरीर देंगे।”

जब पत्रकार ने बताया कि उन्होंने वायरल वीडियो के आधार पर खबर चलाई है और उनका पैर एक्सीडेंट में गंभीर रूप से घायल है, वे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं, तब भी थाना प्रभारी ने कहा कि दो दीवान जी को भेजकर हस्ताक्षर करा लेंगे। पत्रकार ने फॉरेंसिक जांच की बात की तो थाना प्रभारी की ओर से “अव्यवस्था फैला रहे हैं” का आरोप लगाया गया।

उठे सवाल, भक्तों की मांग

इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या भक्तों की पीड़ा दिखाने वाली खबर चलाने पर पत्रकार को थाने जाकर मुकदमा दर्ज कराना पड़ेगा?
पुलिस की भूमिका शिकायतकर्ता बनकर तहरीर मांगने की है या प्राप्त वीडियो की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की?
अव्यवस्था और अवैध वसूली की शिकायतों की जांच के बजाय खबर चलाने वाले को ही आरोपी की तरह क्यों ट्रीट किया जा रहा है?

भक्तों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डीजीपी उत्तर प्रदेश और डीआईजी विंध्याचल परिक्षेत्र से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने पारदर्शी दर्शन प्रोटोकॉल लागू करने, वीआईपी संस्कृति पर पूर्ण रोक लगाने और अवैध वसूली करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने की अपील की है।

अभी तक मंदिर समिति या पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पूरा मामला सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

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