बगहॉ के आर्य समाजी पंडित विपिन आर्य नारायण की कलम सम्मान’ से सम्मानित

बगहॉ के आर्य समाजी पंडित विपिन आर्य नारायण की कलम सम्मान’ से सम्मानित
मीरजापुर। सीखड़ ब्लॉक के बगहॉ गाँव निवासी और क्षेत्र के जाने-माने आर्य समाजी पंडित विपिन आर्य (विपिन कुमार सिंह) को उनके सात्विक जीवन, नशा-मुक्त दिनचर्या, वैदिक परंपराओं के निर्वहन और निस्वार्थ समाज सेवा के लिए नारायण गृहस्थ आश्रम (नारायण नगर, पचराव) द्वारा ‘नारायण की कलम सम्मान’ से सम्मानित किया गया।
सर्व प़थम बिपिन आर्य को गुलाब के फूल गुलदस्ता, अंगवस्त्र, पेन और सुन्दर काण्ड की पुस्तक देकर सम्मानित किया गया।
पंडित बिपिन आर्य का जन्म 1990 में बगहॉ गांव में एक किसान परिवार में हुआ। इनके माता-पिता का नाम श्री मति राम लता सिंह और श्री अशोक कुमार सिंह है।
इण्टर मिडिएट की पढ़ाई क्षेत्रीय विद्यालय श्री शिवाजी नेशनल इण्टर कालेज हॉसीपुर से की।
2010 से आध्यात्मिक गुरु स्व बेचन सिंह आर्य के सानिध्य में हवन यज्ञ , पुजा पाठ सिखा।
गुरू के मरने के बाद उनकी प्रेरणा से क्षेत्र और आस-पास के गांवो में अलख जगाए हुए हैं।
आर्य समाजी पंडित विपिन आर्य ने बताया कि आर्य समाज की प्रमुख विशेषताएँ एवं योगदान:
- वैदिक संस्कारों का निष्काम संपादन: बिना किसी आडंबर, पाखंड या अंधविश्वास के शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गर्भाधान से लेकर विवाह और अंत्येष्टि तक के संस्कारों को संपन्न कराना।
- दैनिक देवयज्ञ व हवन-अनुष्ठान: वातावरण की शुद्धि और जन-कल्याण हेतु नियमित रूप से हवन, यज्ञ और संध्या-उपासना का आयोजन करना।
- कुरीतियों व नशाखोरी का विरोध: स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों पर चलते हुए समाज से जातिवाद, दहेज प्रथा, अंधविश्वास और मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ निरंतर अलख जगाना।
- वेदोपदेश व चरित्र निर्माण: युवाओं और ग्रामवासियों को सत्यार्थ प्रकाश व वैदिक विचारों से जोड़कर उन्हें सात्विक आहार-विहार, योग और नैतिक मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करना।
आश्रम के संस्थापक एवं संचालक ईं. वीरेंद्र कुमार सिंह (विचित्रानंद) ने बताया कि महर्षि ऋष्य श्रृंग सेवा संस्थान (पंजीकृत) का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की प्रतिभाशाली महिलाओं, बच्चों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना है। यह आश्रम जाति, धर्म और क्षेत्रवाद की सीमाओं से ऊपर उठकर कार्य करता है।
उल्लेखनीय है कि सीखड़/क्रियात क्षेत्र में स्वामी दयानंद सरस्वती के अनुयायियों द्वारा आर्य समाज की नींव सबसे पहले बगहा गाँव से ही रखी गई थी। यहीं से भजन, यज्ञ और जलसों की शुरुआत हुई स्व मिश्री लाल सिंह द्वारा।जो बाद में हाँसीपुर, रामगढ़, डोमनपुर और पचराव , धनैता , आदि जैसे गाँवों तक फैली। बगहा से शुरू हुई इस पवित्र वैदिक परंपरा को आज पंडित विपिन आर्य एक निष्ठावान पुरोहित और समाज सुधारक के रूप में निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में विचित्रानंद ने कहा कि निस्वार्थ भाव से बच्चों का पालन-पोषण और समाज सेवा ही ईश्वर प्राप्ति का सच्चा मार्ग है। सेक्सपियर और स्वामी विवेकानंद जी ने कहा कि यदि भगवान को पाना चाहते हो तो छोटे छोटे बच्चों से प्यार करते रहिए,उनको बढ़िया सा गिफ्ट और बढ़िया भोजन कराते रहिये और भगवान का नाम जाप जपते रहिए तो इस कलयुग में भी भगवान बबूरहनी जंगल में आपकी सहायता करेंगे।और मिलते रहेंगे और वैभव लक्ष्मी सदैव आपको सदैव सम्मान दिलाती रहेगी साथ ही उन्होंने बताया कि तंत्र बिद्या वह विधा है जिससे कम समय और कम संसाधन में अधिक पुण्य अर्जित कर जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। जिसमें भेष-भूषा, सात्विक भोजन, रहन सहन , मेल मिलाप बहुत माने रखता है।