
प्राकृतिक आपदाओं में घोषित करके मुआवजा दे किसानों को सरकार
भारत में मिर्च और मटर से प्रसिद्ध सीखड़ ब्लाक घडरोज से परेशान किसान
सीखड़ मीरजापुर। स्थानीय बिकास खण्ड सीखड़ के करीब तीन दर्जन गांवों के खेतो को इन दिनों घडरोजो का आतंक किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। वहीं सीखड़ ब्लाक जो मिर्ची और मटर की खेती के लिए पुरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है।
पचराव गांव के सुरेश सिंह , कैलाश सिंह, राजू सिंह, प़मोद कुमार सिंह, सोनू पाण्डेय का कहना है कि करीब सैकडो की संख्या में घडरोज झुण्ड बनाकर खेतों में घुस रहीं हैं और देखते देखते लहलहाती गेहूं की फसल चर कर सफाचट कर जा रहीं हैं इतना ही नहीं ये घडरोज तार से घेरा बन्दी के बाद भी जम्प करके डाक कर खेत में बोए शब्जी की फसल ( लौकी , कोहड़ा, पालक ,मटर , गोभी, अमरूद , यहां तक फूलों) तक को भी नहीं छोड़ रहें हैं। यहां तक कि किसान खेत की सिंचाई करने के लिए पाइप को भी फाड़ दे रहे हैं।मीर्च की डाली को तोडते चले जा रहे हैं।दिन रात खेतों की रखवाली के वावजूद भी फसल बचा पाना मुश्किल हो गया है। पाहों के रिंकू सिंह, रघु नाथ सिंह का कहना है कि महंगे दामों में बीज ,खाद , सिंचाई और दबाईयो पर खर्च करके फसल तैयार किया लेकिन इन घडरोजो से मेहनत बेकार होता नजर आ रहा है।घडरोजो को नुक्सान पहुंचाना कानून मना है जबकि बन विभाग की ओर से कोई ठोस कदम न होने से समस्या और गंभीर होती चली जा रही है क्षेत्रीय किसान बगहा के सुरेन्द्र शुक्ला, तिलंगा के अशोक सिंह, धनैता के बृजेश सिंह, पचराव गांव के भूपेश पाण्डेय, चन्द्र शेखर पाण्डेय, कैलाश नाथ सिंह, अशोक सिंह मराठा , अरूण कुमार सिंह का कहना है कि सरकार और बन विभाग इस पर कोई ठोस कदम उठाए।
नहीं तो किसानों के मकसद पर पानी फिर जाएगा। इतने महंगे दामों पर खेत बंटाई पर लेने से लगान की भरपाई नहीं हो पाएगी। सरकार बीज ही देकर क्या करेंगी जब फसल इन घडरोजो के कारण पैदा हीं नहीं होगा ।
सरकार इन घडरोजो के नुकसान होने को प्राकृतिक आपदाओं में घोषित करके मुआवजा दिलवाए । नहीं तो किसान भूख की कगार पर आ जाएगा।