पचरॉव गांव के जनक कुमार सिंह ने जिलाधिकारी मीरजापुर से पत्र के माध्यम से अपना झूठा दुखड़ा सुनाया

पचरॉव गांव के जनक कुमार सिंह ने जिलाधिकारी मीरजापुर से पत्र के माध्यम से अपना झूठा दुखड़ा सुनाया
चुनार की पुलिस जांच में जूटि
अब देखना है कि कितना सच और कितना झूठ जांच करती है???
महिला का सत्रह साल में भी नहीं चढ़ा नाम रजिस्टर्ड बसीयत का
योगी सरकार में सेवा करने का फल कितने साल में मिलेगा??
चुनार मीरजापुर। चुनार तहसील अन्तर्गत सीखड़ ब्लाक के पचरॉव गांव के जनक कुमार सिंह पुत्र स्व राम नारायण सिंह ने जिलाधिकारी मीरजापुर से एक पत्र के माध्यम से अपनी नाराज़गी जताई है।
पत्र में एस डी एम चुनार द्वारा स्थगन आदेश की धज्जियां उड़ानें की बात कही गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जनक कुमार सिंह के पिता ने ही 22 फरवरी 2010 को आराजी नम्बर 152 को रजिस्टर्ड बसीयत बीरेंद्र कुमार सिंह की पत्नी सबिता सिंह के नाम कर दिया था ।
जनक कुमार सिंह के बड़े भाई दिनेश कुमार सिंह ने गलत तरीके से लेखपाल से मिलकर बरासत करा लिया था।
जो ग़लत बरासत को खारिज करने का मुकदमा चल रहा है 2010 से ही।
दिनेश कुमार सिंह के मरने के बाद जनक कुमार सिंह ने 2025 में जिस दिन एस डी एम चुनार राजेश कुमार वर्मा को प्रार्थना पत्र दिया उसी दिन विपक्षी सबिता सिंह को विना बुलाए और विना सुने आनन फानन में स्थगन आदेश पारित कराकर सड़क पर बोर्ड लगवा कर डंका पिटने लगे।
अब यह खेत आराजी नम्बर 152 जंगल का रूप धारण कर जंगली शूकर, सियार ,नील गाय, सर्प , गोहटा ,शाही , आदि अनेकों हिन्सक जानवरों का आसियाना बन गया है और पचासों बिघा जमीन की फसल नष्ट हो रही है और किसानों का हर साल लाखों रुपए का नुक़सान हो रहा है।
और किसान परेशान हैं।
जनक कुमार सिंह ने ही एक जर्मन सैफर्ड का कुत्ता का अपरहण करवा दिया तथा दुसरे जर्मन सैफर्ड कुत्ते को जहर देकर मार डाला।जिसका मुकदमा चुनार थाने में लम्बित है।
ईन्जी बीरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बिचित्रानन्द पर जो आरोप लगाया गया है वह एकदम झूठा और निराधार है।
अब सबसे पहले जांच का बिषय है कि 2010 से मुकदमा चल रहा है।एस डी एम चुनार राजेश कुमार वर्मा ने 2025 में स्थगन आदेश आनन फानन में एकही दिन में क्यों किया??
जब की चुनार के ही एस डी एम * दिवाकर सिंह* ने सबिता सिंह को खेत जोतने बोने का आदेश दिया है।
दुसरा रजिस्टर्ड बसीयत वह भी महिला के नाम पर 17 साल में नाम क्यों नहीं चढ़ा??
जबकि चुनार के क्षेत्रीय लेखपाल और कानूनगो ने 2025 में ही रिपोर्ट लगा रखी है रजिस्टर्ड बसीयत की।
बाईस और पच्चीस साल की छोटी-छोटी बच्चियां बबूल के जंगल में किस लिए आती है? जब खेत में कुछ बोया ही नहीं गया है??
बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह है कि जवान लड़कियां जंगल में किस लिए आती है ??
विपक्षी बीरेंद्र कुमार सिंह उर्फ बिचित्रानन्द की मांग है जिलाधिकारी महोदय मीरजापुर से इसकी जांच करवाई जाय और जनक कुमार सिंह के ऊपर 420 की मुकदमा दर्ज किया जाय झूठा मूठा प्रार्थना पत्र देने के सम्बन्ध में।
और मजे की बात यह है कि जनक कुमार सिंह के पिता जी ने ही इनसे तथा इनके बड़े भाई दिनेश कुमार सिंह से तंग आकर दैनिक जागरण में विज्ञापन गजट कराकर आश्रम या संस्थान बनवाने के लिए बसीयत की है कि हमारा पुरा खेत आराजी नम्बर 152 देश की और समाज की सेवा में लगा दी जाय।
जो आज महर्षि ऋष्य ऋ॑ग सेवा संस्थान पंजी, एवं नारायण गृहस्थ आश्रम नारायण नगर पचराव के रूप में समाज के लिए समर्पित है।
और दोनों भाई जनक कुमार सिंह और दिनेश कुमार सिंह ने बुढ़ापे में अपने बाप की सेवा भी नहीं किया बल्कि दुसरा सेवा करने के लिए आया तो उसको तथा पिता स्व राम नारायण सिंह को तंग किया और पैसे के बल पर तंग कर रहे हैं।