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पत्रकार सरिता सिंह : लापता होने से बरामदगी तक पुलिस के दावों पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाती है अब देखना है

पत्रकार सरिता सिंह : लापता होने से बरामदगी तक पुलिस के दावों पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाती है अब देखना है

हेडलाइन: चुनार की लापता पत्रकार सरिता सिंह राजगढ़ में बंधक मिलीं, पेट्रोल डालने की कोशिश नाकाम; पुलिस बयानों और परिजनों के दावों में भारी विरोधाभास, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

मिर्जापुर। चुनार थाना क्षेत्र के दीक्षितपुर गांव निवासी हिन्दी दैनिक ‘पवन प्रभात’ की मुख्य संवाददाता सरिता सिंह के 30 अप्रैल से लापता होने और 6 मई को राजगढ़ थाना क्षेत्र में बंधक अवस्था में बरामद होने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस के आधिकारिक बयानों और परिजनों के दावों में सामने आए विरोधाभासों ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है। पत्रकार समुदाय में गहरे आक्रोश के बीच उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

कैसे लापता हुईं सरिता सिंह
पति सुभाष सिंह के अनुसार, 30 अप्रैल 2026 को अदलहाट थानाध्यक्ष अजय सेठ के फोन पर सरिता सिंह को ‘मंजरीराव मैडम’ से मिलने थाने बुलाया गया था। फोन पर कहा गया कि चुनार की क्षेत्राधिकारी मैडम बात करना चाहती हैं। रास्ते में छोटी बहन से बातचीत में सरिता ने बताया कि वह सीओ मैडम से मिलकर लौट आएंगी। शाम करीब 6 बजे नारायणपुर चौकी पर अंतिम बार बात होने के बाद उनका मोबाइल नंबर 8423572416 स्विच ऑफ हो गया।

परिजनों का आरोप है कि लापता होने से कुछ दिन पहले ही खबर संकलन को लेकर सरिता का सीओ चुनार से विवाद हुआ था और उन्हें धमकियां भी मिली थीं।

48 घंटे बाद भी सुराग नहीं, जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत
48 घंटे बीतने के बावजूद कोई सुराग न मिलने पर पीड़ित पति ने 2 मई को जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या 40019926012280 दर्ज कराई, जिसकी स्थिति ‘लंबित’ है। प्रकरण 02-05-2026 को थानाध्यक्ष को अग्रसारित किया गया, पर स्थिति ‘अनमार्क’ बनी हुई है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने लापता होने के तुरंत बाद चुनार में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ के अवसर पर OSD मंजरी राव को लिखित शिकायत दी थी। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी सूचना रजिस्टर की गई थी।

6 मई को बंधक अवस्था में बरामदगी
6 मई, बुधवार सुबह सरिता सिंह राजगढ़ थाना क्षेत्र के गरेरी गांव के सिवान में हाथ-पैर बंधी, मुंह दुपट्टे से बंधा और शरीर पर पेट्रोल डली हालत में मिलीं। ग्रामीणों की सूचना पर राजगढ़ पुलिस ने उन्हें सकुशल बचाया। आशंका है कि उन्हें जलाने की कोशिश की जा रही थी।

पुलिस के बयान और परिजनों के दावों में टकराव
बरामदगी के बाद मिर्जापुर पुलिस के बयानों ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं:

  1. पत्रकार होने की बात छिपाई: पुलिस के आधिकारिक बयान में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि सरिता सिंह पत्रकार हैं। जबकि वह ‘पवन प्रभात’ अखबार की मुख्य संवाददाता हैं और वर्षों से पत्रकारिता कर रही हैं। 2. शिकायत किसने दी, इस पर विरोधाभास: पुलिस का दावा है कि सरिता की मां निर्मला देवी ने 4 मई को थाना अदलहाट में गुमशुदगी की तहरीर दी थी। सर्विलांस की मदद से 6 मई को उन्हें बरामद किया गया। जबकि परिजनों के अनुसार, सरिता के पति सुभाष सिंह ने लापता होने के तुरंत बाद ही चुनार में शिकायत दी थी और 2 मई को चुनार थाने में गुमशुदगी दर्ज कराने की बात कही थी। सवाल उठता है कि पुलिस ने पति द्वारा दी गई शिकायत का जिक्र क्यों नहीं किया। 3. तारीखों का पेंच: खबरों के अनुसार सरिता 30 अप्रैल से लापता थीं। परिजन 2 मई को चुनार थाने में तहरीर देने की बात कह रहे हैं, जबकि पुलिस 4 मई को मां द्वारा अदलहाट में तहरीर देने की बात कह रही है। तारीखों में यह अंतर जांच का विषय है।
    पुलिस अधीक्षक ऑपरेशन के अनुसार, महिला के बयान और साक्ष्यों में विरोधाभास है, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

पत्रकार संगठनों में रोष, उठे ये सवाल
एक महिला पत्रकार को बंधक बनाकर पेट्रोल डालने की घटना और उसके बाद पुलिस के बयानों में आ रही भ्रामक जानकारी से पत्रकार संगठनों में गहरा रोष है। मुख्य सवाल ये उठ रहे हैं:

  • सीओ चुनार से विवाद के बाद पत्रकार का इस तरह लापता होना और फिर ऐसी हालत में मिलना कहीं दबाव बनाने की साजिश तो नहीं? • पुलिस सरिता सिंह के पत्रकार होने की बात और पति सुभाष सिंह द्वारा पहले दी गई शिकायत को क्यों छिपा रही है? • अदलहाट पुलिस की भूमिका इस पूरे प्रकरण में संदिग्ध क्यों दिख रही है?
    परिजनों की मांग
    परिजनों व पत्रकार समुदाय की जिला प्रशासन से मांग है कि मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। सीओ चुनार से हुए विवाद की भूमिका की भी जांच हो और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

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