


चुनार में मनहरन महा कवि सम्मेलन हुआ संपन्न
प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी साहित्य संत कुटीर धाम चुनार के प्रांगण में मौजी जियरा एसोसिएशन व चुनार क्लब द्वारा मंचीय मनहरन महा कवि सम्मेलन का शुभारंभ दैनिक गंगा आरती के तुरंत बाद अध्यक्षता कर रहे सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी निवासी सुकुलपुरा ने प्रांगण में स्थापित मां सरस्वती जी और गणेश भगवान जी के प्रतिमा पर माल्यार्पण करके किया। मुख्य अतिथि के रूप में डा विजय मौर्य चिकित्सक चुनार और विशिष्ट अतिथि गण के रूप में कृपा शंकर सिंह(मेजर साहब) पूर्व प्रधानाचार्य पी डी एन डी इंटर कालेज चुनार, अखिलेश पांडेय पूर्व प्रवक्ता पी डी एन डी इंटर कालेज चुनार, ई० सभाजीत सिंह की गौरवमयी उपस्थिति रही।
काव्य पाठ वाराणसी से पधारी राज लक्ष्मी मिश्रा “मन” के सरस्वती वंदना से शुभारंभ हुआ
हंस वाहिनी वीणा वाली
स्वर लहरी का ज्ञान दे।
नवगीत तालबद्ध रचूं कविता
जननी तू वरदान दे।।
चुनार के सदाबहार कवि राजकुमार “राजन” ने सुनाया –
कविता तेरा रूप विशेष।
गीत छंद नवगीत सभी से
मिलता है उपदेश।।
पड़ती से पधारे विजय नारायण तिवारी “रसिक’ ने सुनाया –
इधर भी उल्लू उधर भी है उल्लू,
यह महफिल भी उल्लू की जमकर सजी है।
बना आज दूल्हा गधा है यहां पर,
गधी पर चढ़ी उल्लू की दुल्हन बनी है।।
चुनार के युवा कवि संजय कुमार यादव उमंग ने सुनाया-
अमेरिका की औकात नहीं है हम हैं विश्व गुरु महान।
चुनार के कवि आदित्य गुप्ता पदयात्री ने सुनाया-
जय गंगा महारानी, जय गंगा महारानी।
जिसने सगर के पुत्रों को मोक्ष भी हैं दिलाएं,
जय गंगा महारानी जय गंगा महारानी।।
चुनार के कवि माखनलाल झटपट में सुनाया-
लगा दो आग फैशन को जो कपड़े कम पहनते हैं।
जो दिन में चार चार बार वो कपड़े बदलते हैं।।
मुख्य अतिथि डॉक्टर विजय मौर्य ने सुनाया-
तेरे आंचल का था मैं ही सितारा।
कलेजा का टुकड़ा था आंखों का तारा।।
अहरौरा से पधारी कवियित्री रूसखाना बानो ने सुनाया-
वो उम्र भी लाजवाब थी, ये उम्र भी है लाजवाब।
वाराणसी से पधारी कवियित्री राजलक्ष्मी मिश्रा “मन” ने सुनाया-
कौन कहता है की दौलत से ही जमाना है।
यहां तो खाक में भी मोतियों का दाना है।।
संजय शर्मा “बागी” ने सुनाया-
माई से ना बढ़ केहूं इहां।
सच पाल सयान बनावैली माई।।
सुरेंद्र साहिल अहरौरा ने सुनाया- मंच से बह रही काव्य धारा है। सामने मां गंगा का किनारा है।।
चुनार के वरिष्ठ कवि सुरेंद्र मिश्र “अंकुर” ने सुनाया-
बदला भारत बदल गया पहचान रे बप्पा।
कौन कहेगा इसको हिंदुस्तान रे बप्पा।।
मुंदीपुर चुनार के वरिष्ठ कवि राजेश मिश्र “ज्योति” ने ” ई चुनार हऽ चच्चा” शीर्षक कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरी।
एक से एक यहां धुरंधर,
समझें उसे न बच्चा।
ई चुनार हऽ चच्चा,
ई चुनार हऽ चच्चा।।
संचालन कर रहे ओम प्रकाश श्रीवास्तव “प्रकाश” मिर्जापुरी ने सुनाया-
वारिस प्यार की होगी तो
आशिक भीग जाएगा।
निगाहें होंगी जब कातिल
तपस्वी भींग जाएगा।।
बाल कवियित्री सृजी गुप्ता चइता सुनायी।
आयोजक प्रतिनिधि के रूप में चुनार के कवि शीतला प्रसाद गौरव ने अपनी रचना सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
इसके अतिरिक्त अफसर अली अफसर, राकेश राही, जय कुमार जय ने भी अपना काव्य पाठ प्रस्तुत किया। ई० सभाजीत सिंह ने भी संचालन कर रहे वरिष्ठ कवि ओमप्रकाश श्रीवास्तव “प्रकाश” मीरजापुरी के पिताजी द्वारा दो गीतों की कुछ पंक्तियों को गाया। मौजूद विरहा गायक राजेश यादव और प्रताप का भी मंचीय सम्मान हुआ। दोनों गायक कलाकारों ने भी कुछ संक्षिप्त पंक्तियों का प्रस्तुतीकरण किया। इस अवसर पर नंदकिशोर तिवारी, डा श्री प्रकाश, दयाशंकर पांडेय जिला कांग्रेस प्रभारी भदोही, चुनार के सम्मानित पत्रकारगण सहित नगर के संभ्रांत नागरिकों की उपस्थिति रही।
काव्य पाठ पूर्व सम्मानित कवियों, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथिगणों व प्रांगण के दैनिक देखरेख करने वाले तीन प्रमुख कार्य कर्ताओं का मंच पर अंग वस्त्रम् व माल्यार्पण से सम्मान किया गया। अन्त में अध्यक्ष महोदय ने भी अपनी एक रचना पढ़कर अगले कवि सम्मेलन तक के लिए स्थगित की घोषणा किया।