
न्यू वुधीराम डेयरी का हुआ शुभारंभ
यदुवंशियों की पारम्परिक पुजा के साथ
ताई का अनेकों चमत्कार देखकर लोग आश्चर्य चकित रह गए
श्री रामचरितमानस का अखण्ड पाठ कराया गया
क्षेत्र के बिठ्ठलपुर , सीखड़ गांव में जो सीखड़ -मगरहा रोड पर स्थित है। न्यू वुधीराम डेयरी का शुभारंभ हुआ। जिसके मुख्य अतिथि श्रीश्री1008 जगतगुरू रामानुजाचार्य स्वामी हरिप़पन्नाचार्य जी महाराज ऊर्फ हरिहरानन्द जी महराज थे। सर्व प़थम श्री रामचरितमानस का अखण्ड पाठ हुआ। उसके बाद यदुवंशियों की पारम्परिक पुजा ** कराहा ** का आयोजन कन्हैया जी भगत के द्वारा सम्पन्न कराया गया। सर्व प़थम सनातन धर्म पद्धति द्वारा बेद मन्त्रों से पुरोहित पंडित–सुनील मिश्रा और भोलू मिश्रा द्वारा पुजा करायी गई जिसके यजमान बुधीराम यादव ,सुशील यादव उर्फ बच्ची सरदार थे ।उसके बाद अनील जी भगत द्वारा कराहा की पुजा करायी गई।जो तीन घंटे तक पुजा चला । जिसमें कुल देवी के साथ-साथ सभी देवी देवताओं की पुजा की गई। जिसमें पांच मिट्टी के बर्तन गगरी (ताई ) में दूध भर कर गाय के गोबर से बने उपले पर रखकर गर्म किया गया। जब दूध खौलने लगा तब उस दूध से सभी देवताओं को समर्पित किया गया है।उस गर्म खौलते दूध से छः महीने के बच्चे को नहलवाया गया तथा बर्फ के ऊपर ताई रखी गई फिर भी मंत्र और माई की कृपा से दूध बह रहा था और विना आग के कयी बर्तनों के ऊपर दूध वाला ताई रखा गया था फिर भी दूध उबल रहा था। कन्हैया महाराज ने उस उबलते दूध से कयी बार नहाये। फिर भी कुछ नहीं जला।यह सब चमत्कार देखकर लोग आश्चर्य चकित रह गये।यह यदुवंशियों की परम्परा बहुत पुरानी है। जिसको देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु नर नारी उपस्थित थे। मुख्य अतिथि स्वामी हरिप़पन्नाचार्य जी महाराज ने कहा कि बड़े ख़ुशी की बात है कि यह शुभ कार्य सनातन धर्म पद्धति से सम्पन्न कराया गया तथा यदुवंशियों की पारम्परिक पुजा करहा से सम्पन्न कराया गया। सभी हिन्दुओं को अपनी पारम्परिक पुजा छोड़नी नहीं चाहिए। जहां पर कुल देवी देवताओ की पुजा होती रहती है वहा हमेशा बरक्कत होती रहती है।उसके बाद प़साद बितरण किया गया। तत्पश्चात भब्य भण्डारे का भी आयोजन किया गया। दूध डेयरी के मालिक बुधीराम यादव और सुशील यादव ने सभी आंगन्तुको का आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर -सुशील यादव , सुनील यादव, रंजीत यादव ,–मन्जे यादव , बिजया सिंह, सुनील मिश्रा, बिनय पाठक, तूफानी शुक्ला, सुरेन्द्र त्रिपाठी,प्रदीप पाण्डेय,बबलू यादव , बेचू यादव , तेज बहादुर , केशव यादव , कृष्णा यादव, कन्हैया यादव , वाराणसी से कथा वाचक दीनकर महाराज तथा प़याग राज से हरिहरानंद जी महाराज, बिचित्रानन्द आदि लोग मुख्य रूप से उपस्थित थे।